राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना (गोबरधन योजना)

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ अर्थव्यवस्था; ऊर्जा

सन्दर्भ

  • हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना (गोबरधन – Galvanising Organic Bio-Agro Resources Dhan) को ₹23,731 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ स्वीकृति प्रदान की है।

गोबरधन योजना क्या है?

  • राष्ट्रीय परिपत्र(Circular) जैव-ऊर्जा योजना का उद्देश्य संपीड़ित जैव-गैस (CBG) के उत्पादन के लिए एक सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जिसमें प्रबंधित मूल्य निर्धारण तंत्र, पूंजीगत सब्सिडी, पाइपलाइन अवसंरचना सहायता तथा वित्त तक आसान पहुँच शामिल है।
  • इसका उद्देश्य देश में CBG उत्पादन को 10 गुना से अधिक बढ़ाना तथा इस क्षेत्र के लिए स्थिर एवं पूर्वानुमेय निवेश वातावरण तैयार करना है।

यह निम्नलिखित पूर्ववर्ती कार्यक्रमों द्वारा रखी गई आधारशिला पर आधारित है:

  • सस्ती परिवहन व्यवस्था हेतु सतत विकल्प (SATAT) पहल;
  • जैविक खाद के लिए बाजार विकास सहायता (MDA) योजना;
  • बायोमास एकत्रीकरण मशीनरी (BAM) योजना;
  • पाइपलाइन अवसंरचना विकास (DPI) योजना; तथा
  • वित्तीय सहायता हेतु राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा कार्यक्रम।
  • यह कृषि अवशेषों, पशु अपशिष्ट (गोबर), चीनी उद्योग के अपशिष्ट (जैसे प्रेस मड), शहरी जैविक कचरे तथा अन्य जैव-अवक्रमणीय बायोमास जैसे विविध जैविक अपशिष्टों से संपीड़ित जैव-गैस (CBG) के उत्पादन को प्रोत्साहित करती है।
  • उत्पादित CBG को परिवहन क्षेत्र में उपयोग के लिए संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) के साथ मिश्रित किया जा सकता है तथा पाइप्ड प्राकृतिक गैस (PNG) नेटवर्क के माध्यम से वितरित किया जा सकता है।

योजना की प्रमुख विशेषताएँ

  • सुनिश्चित बाजार एवं प्रशासित मूल्य निर्धारण: संपीड़ित जैव-गैस (CBG) का प्रशासित मूल्य ₹2,110 प्रति मेट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBTU) निर्धारित किया गया है, साथ ही सुनिश्चित बाजार और प्रशासित मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है।
  • यह सरकारी समर्थन और बाज़ार-आधारित लागत-साझाकरण के संयोजन के माध्यम से उत्पादकों के लिए दीर्घकालिक राजस्व स्थिरता तथा उपभोक्ताओं के लिए वहनीय लागत सुनिश्चित करता है।
  • पूंजीगत सहायता: पात्र ग्रीनफील्ड तथा क्षमता विस्तार करने वाली ब्राउनफील्ड CBG परियोजनाओं को स्थापित CBG क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन (TPD) पर ₹2 करोड़ तक की पूंजीगत सहायता प्रदान की जाएगी।
  • इसमें संयंत्र की मुख्य मशीनरी, फीडस्टॉक संग्रहण अवसंरचना तथा जैविक खाद प्रसंस्करण की सुविधाएँ शामिल हैं।
  • इससे परियोजनाओं की प्रारंभिक लागत कम होने तथा निजी उद्यमों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), सहकारी समितियों एवं ग्रामीण उद्यमियों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है।
  • पाइपलाइन अवसंरचना का विकास: इस योजना का एक महत्वपूर्ण घटक पाइपलाइन अवसंरचना का विकास है।
  • इसके अंतर्गत क्लस्टर-आधारित पाइपलाइन नेटवर्क, CBG संयंत्रों को मुख्य पाइपलाइन (Trunk Pipeline) से जोड़ने वाली स्वतंत्र पाइपलाइनें तथा सिटी गैस वितरण (CGD) नेटवर्क के साथ एकीकरण को समर्थन दिया जाएगा।
  • बेहतर संपर्क से परिवहन एवं निकासी लागत में कमी आएगी, विश्वसनीय गैस उठान (Offtake) सुनिश्चित होगा, बाजार तक पहुँच का विस्तार होगा तथा देश में उत्पादित CBG के उपयोग में वृद्धि होगी।

महत्व

  • यह योजना अनेक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को समर्थन देती है, जैसे— ऊर्जा सुरक्षा, परिपत्र अर्थव्यवस्था, अपशिष्ट से संपदा (Waste-to-Wealth) मिशन, आत्मनिर्भर भारत, जलवायु परिवर्तन शमन, आय के विविध स्रोतों के माध्यम से किसानों की आय दोगुनी करना तथा विकसित भारत का लक्ष्य।
  • यह क्षेत्र की तीन दीर्घकालिक आवश्यकताओं— लाभकारी मूल्य, सुनिश्चित खरीद (Offtake) तथा पूंजीगत सहायता— को पूरा करती है, जिससे वर्तमान लगभग 300 संचालित CBG संयंत्रों की संख्या समय के साथ बढ़कर लगभग 5,000 होने की संभावना है।

अपेक्षित लाभ

  • ऊर्जा सुरक्षा: आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी तथा स्वच्छ गैसीय ईंधन का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा।
  • अपशिष्ट प्रबंधन: कृषि, पशुधन, औद्योगिक एवं शहरी अपशिष्ट को उपयोगी ऊर्जा में परिवर्तित करेगा तथा जैविक अपशिष्ट के वैज्ञानिक निपटान को बढ़ावा देगा।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था: किसानों को कृषि अवशेष एवं पशुओं के गोबर की बिक्री से अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे तथा CBG इकाइयों की स्थापना एवं संचालन से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित होंगे।
  • पर्यावरणीय लाभ: ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी, पराली जलाने एवं जैविक कचरे के खुले में निपटान में कमी होगी, जैविक खाद के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होगा।
  • निजी निवेश: स्थिर मूल्य निर्धारण एवं पूंजीगत सहायता से जैव-ऊर्जा क्षेत्र में निवेश आकर्षित होगा तथा परियोजनाओं का वित्तीय समापन तेज़ी से होगा।

चुनौतियाँ

  • पाइपलाइन अवसंरचना का समय पर विकास।
  • फीडस्टॉक का विश्वसनीय संग्रहण एवं एकत्रीकरण।
  • केंद्रीय एजेंसियों, राज्यों एवं स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय।
  • CBG संयंत्रों की वित्तीय स्थिरता एवं परिचालन दक्षता सुनिश्चित करना।
  • CBG एवं जैविक खाद की गुणवत्ता के मानकों को बनाए रखना।

आगे को राह

  • गोबरधन योजना की सफलता प्रभावी कार्यान्वयन, सुदृढ़ अवसंरचना, समय पर वित्तीय सहायता तथा निजी निवेशकों एवं ग्रामीण उद्यमों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करेगी।
  • पूर्वानुमेय मूल्य निर्धारण व्यवस्था, बेहतर संपर्क एवं पूंजीगत सहायता के माध्यम से यह योजना भारत के CBG क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा, सतत अपशिष्ट प्रबंधन तथा ग्रामीण आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनाने की क्षमता रखती है।

स्रोत: TH

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: जीएस-1/ भारतीय विरासत एवं संस्कृति, जीएस-3/ अर्थव्यवस्था सन्दर्भ 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर भारत सरकार ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में भारतीय हथकरघा क्षेत्र के योगदान को मान्यता दी, जो सांस्कृतिक विरासत को सतत आर्थिक विकास के साथ जोड़ता है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का परिचय  राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रतिवर्ष...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ शासन व्यवस्था एवं संविधान सन्दर्भ सरकार ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि “क्रीमी लेयर” की अवधारणा को अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण पर लागू नहीं किया जा सकता। परिचय पृष्ठभूमि: सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर की गई थीं, जिनमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की तरह SC/ST की...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ अंतर्राष्ट्रीय संबंध सन्दर्भ भारत और श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अद्यतन करने संबंधी वार्ताओं को आगे बढ़ाने तथा शीघ्र ही सामाजिक सुरक्षा समझौते (Social Security Pact) पर हस्ताक्षर करने पर सहमत हुए हैं। प्रमुख बिंदु भारत के दौरे पर आए भारतीय विदेश सचिव और श्रीलंका के राष्ट्रपति के बीच हुई वार्ता में...
Read More

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ शासन व्यवस्था; जीएस/3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सन्दर्भ अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) कोष के अंतर्गत 22 निजी कंपनियों को रियायती ऋण (Soft Loans) वितरित किए गए। RDI कोष का परिचय अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) कोष की स्थापना सरकार द्वारा 2025 में की गई थी। इस योजना के अंतर्गत छह वर्षों की अवधि...
Read More

राज्यसभा ने ₹54,067 करोड़ के व्यय हेतु विनियोग विधेयक पारित किया पाठ्यक्रम: जीएस-2/ संविधान एवं शासन व्यवस्था सन्दर्भ राज्यसभा ने विनियोग विधेयक, 2026 पारित किया, जिसके तहत वित्त वर्ष 2022–23 में किए गए व्यय के लिए अतिरिक्त अनुदान (Excess Grants) के रूप में भारत की संचित निधि से ₹54,067.44 करोड़ निकालने की अनुमति दी गई।...
Read More
scroll to top